दीदी की ननद की बेटी की चुदास


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सपना ने अपनी पेंटी भी उतार दी, अब वो नीचे से पूरी नंगी थी, उसकी गांड क्या गजब की थी… एकदम दूध जैसी सफेद!
सपना जब पेंटी को अपने पैरों से निकालने के लिए सामने की ओर झुकी तो मुझे पीछे से उसकी हल्के काले बालों से घिरी गुलाबी नंगी चूत दिखाई दी, उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिससे मेरा लंड उत्तेजना में भरकर मेरे जींस से बाहर निकलने को तड़पने लगा।
मैंने उसे ज़्यादा तड़पने नहीं दिया और अपनी जींस को खोलकर जाँघों तक कर लिया और अपने लंड को हाथों में ले कर सहलाने लगा। लंड पूरी तरह तन कर लाल हो गया था।
उधर सपना को ना जाने क्या हुआ और वो पेंटी को वहीं फेंक दी और पेशाब करके सिर्फ़ लैगीज पहन ली।
मैं उसे एकटक देख रहा था और अपने लंड को सहला रहा था। वो वापस आने लगी.. पर मैं वहाँ से नहीं हटा। पता नहीं मुझे अब अंजाम की परवाह नहीं थी, मैं वहीं खड़ा सपना से नजर मिला कर अपने लंड को सहलाता रहा।
मैंने देखा सपना तिरछी नजरों से मेरे लंड को देखते हुए बगल से चली गई। उसने बाइक के पास जाकर मुझे आवाज़ दी। मैं उसी अवस्था में घूम गया और जींस को पहनते हुए उसके करीब जाने लगा।
मेरा लंड अब भी बाहर था। चुदाई की सोच कर उत्तेजना में लंड इस कदर तना हुआ था कि वो जींस के अन्दर समा नहीं रहा था। मैंने अपनी टी-शर्ट से उसे ढक तो दिया.. पर उसके उभार को छुपा नहीं पाया और वैसे ही सपना के पास चला गया।
वो मेरे लंड के उभार को देख कर घूम गई थी, सपना की पीठ मेरी ओर हो गई थी। मुझ पर चुदाई का भूत सवार हो गया था, मेरा पूरा शरीर काँपने लगा लगा था। पीछे से सपना की गांड से लंड को सटा कर मैंने उसे बांहों में भर लिया।
सपना- क्या करते हो मामाजी? छोड़िए मुझे!
यह बात उसने मुझसे गुस्से में कही, पर मैंने अनसुना कर दिया और उसकी गांड में अपने लंड को और जोर से दबा दिया।
इस पर वो तिलमिला गई और घूम कर मुझे धक्का देते हुए बोली- होश में आइए मामाजी.. आप घर चलिए, मैं सबको आपकी इस हरकत के बारे में बताऊँगी।
यह सुनते ही मेरा माथा चकरा गया, मैंने एक बार प्यासी नज़रों से सपना को देखा, वो मुझे गुस्से से घूर रही थी।
उसका गुस्सा देख कर लंड महाशय कोने में दुबक लिए.. मुझसे कुछ भी कहा नहीं जा रहा था, मैंने चुपचाप जींस के ज़िप को बंद किया और बाइक पर बैठ गया.. सपना भी मेरे पीछे बैठ गई।
मैंने बाइक को स्टार्ट किया और हम दोनों घर की ओर चल दिए।

मैं रास्ते भर सोचता रहा कि अब क्या होगा.. सपना तो सबको बता देगी, इस सबके बाद मेरा क्या होगा! यही सब उल्टे-सीधे ख्याल मन में आते रहे।
सपना रास्ते भर चुप रही.. आख़िर हम लोग घर पहुँच ही गए। मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था.. घबराहट से मुझे पसीना आ रहा था।
सपना जब बाइक से उतर कर जा रही थी, तो मैंने पीछे से आवाज़ दी- सपना आई एम सॉरी.. प्लीज़ किसी को कुछ मत बताना, तुम जो कहोगी.. मैं वही करूँगा प्लीज़..!
उसने मुझे कुछ भी जवाब नहीं दिया, उल्टे मुझे गुस्से से घूरते हुए घर के अन्दर चली गई।
सपना के इस गुस्से को देख कर मेरी गांड फट गई थी.. मैं सोच रहा था कि पता नहीं अब क्या बवाल होने वाला है।
मैं डर के मारे बाहर ही खड़ा था। करीब दस मिनट बाद सपना फिर से बाहर आई और मुझे बुला कर घर के अन्दर ले गई। अन्दर जाकर देखा तो सभी अपने-अपने काम में मग्न थे.. माहौल बिल्कुल शांत था। यह देख कर मुझे थोड़ी राहत मिली कि सपना ने किसी को कुछ नहीं बताया था।
मैं सीधा अपने कमरे में गया और बिस्तर पर पसर गया। मेरी आँखों के सामने कभी सपना की नंगी गांड आती.. तो कभी उसका गुस्से में लाल चेहरा आता।
थोड़ी ही देर में सपना मेरे कमरे में आई उसके हाथ में नाश्ते की ट्रे थी।
मैं उसे देखते ही उठ कर बैठ गया, वो मेरे पास आई और चाय का कप मुझे देते हुए बोली- मामाजी, आप शादी क्यों नहीं कर लेते? मामी आ जाएँगी तो ऐसे गंदे ख्याल आपके मन में नहीं आएँगे।
मैं चुपचाप नज़रें नीचे किए चाय पी रहा था।
तभी रूम में सपना को ढूँढते हुए राखी आ गई, सपना ने उसे ये कहकर वापस भेज दिया कि उसे मुझसे कुछ ज़रूरी काम है।
राखी के जाने के बाद वो मुझसे बोली- मामाजी आपने कहा है ना.. कि मैं जो कहूँगी, आप करोगे.. तो मैं चाहती हूँ कि इसी साल में आप शादी कर लो.. मानोगे ना मेरी बात!
मैं- ठीक है.. कर लूँगा, पर लड़की तुम्हीं को पसंद करनी होगी!
सपना खुश होते हुए बोली- ठीक है.. मैं अपने लिए मामी पसंद कर लूँगी और हाँ.. आपने जो आज किया है, उसकी सज़ा के तौर पर आप मुझे बाइक चलाना सिखाओगे।
इतना कहते हुए उसने नजरें नीची कर ली थीं।
मैंने भी तुरंत हामी भर दी।
शाम को सपना और राखी दोनों तैयार थी, मैंने भी फ्रेश होकर उन दोनों को अपने साथ लिया और वहीं पास के मैदान में ले गया। मैदान काफ़ी बड़ा था और चारों तरफ़ पेड़ से घिरा हुआ था। मैदान में कुल दो चार ही लोग थे, जो मैदान के एक कोने में बैठे ताश खेल रहे थे।
मैदान में दोनों को बाइक से उतरने को कहा, फिर बाइक स्टार्ट करके सपना से बाइक में मेरे आगे बैठने को कहा और मैं पीछे को हो गया, सपना मेरे आगे दोनों तरफ पैर करके बाइक पर बैठ गई।
सपना- हम्म.. मैं बैठ गई, अब मुझे क्या करना होगा?
मैं- अब दोनों हाथ से हैंडल पकड़ो..
सपना- पकड़ लिया.. इसके बाद?
मैं- अब बाएं हाथ से क्लच दबाओ।
सपना- दबाया.. फिर!
मैं- अब गियर लगाओ..
सपना- मामाजी गियर कहाँ है?
मैं- तुम्हारे बाएं पैर के नीचे, अब उसे पीछे की ओर एक बार दबाओ.. फिर धीरे-धीरे क्लच छोड़ते हुए एक्सीलेटर घुमाना.. ठीक है समझ गई ना!
सपना ने ‘हाँ’ में सिर हिलाया और जैसा मैंने कहा था, वैसा करने की कोशिश की, पर कर नहीं पाई। उसने क्लच को झटके से छोड़ दिया, तो बाइक झटका लेकर बंद हो गई। इस झटके में मेरे लंड ने सपना के चूतड़ों पे भी एक झटका दे दिया। मेरे पैर ज़मीन पर थे, इस वजह से बाइक नहीं गिरी।
इस तरह मेरे कहने पर सपना ने कई बार कोशिश की, पर वो बाइक को आगे नहीं बढ़ा पाई।
यह देख कर राखी.. जो वहीं पास में ही खड़ी थी.. ज़ोर-ज़ोर से हँसे जा रही थी और इधर बार-बार सपना के चूतड़ों से लंड टकराने से मेरे लंड महाशय भी तन गए थे। मैं सपना से थोड़ी दूरी बनाकर बैठा हुआ था.. जिस कारण सपना को पजामे के भीतर मेरे खड़े लंड का एहसास नहीं हो रहा था।
सपना- मामाजी आप मुझे बाइक को आगे बढ़ा कर दो फिर मैं चलाऊँगी।
मैं- ठीक है.. मैं ऐसा ही करता हूँ।
क्योंकि मैं सपना के पीछे बैठा था.. इसलिए मैं पीछे से ही बाइक का हैंडल पकड़ने के लिए आगे को आ गया। अब में सपना की पीठ से बिल्कुल चिपक गया.. ऐसा कि हमारे बीच से हवा भी ना गुजर सके।
अब मेरा खड़ा लंड सपना की कमर से दब गया था। मैंने सपना के पैर को भी उठा कर बाइक के इंजन गार्ड पर रख दिया और अपने पैरों को गियर और ब्रेक स्टैंड पर रख दिया.. जिससे मेरी जाँघों के ऊपर सपना की जांघें आ गईं।
इस पोज़ीशन में मैं अपना होश फिर से खोने लगा था। मैंने अपने मन पर तो काबू रखा था.. पर इस लंड को कौन समझाए.. गांड के ऊपर होते हुए भी इसे सपना की गांड और बुर दोनों की गर्मी महसूस हो रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मेरा लंड सपना की कमर और मेरे पेट के बीच दबा हुआ तड़प रहा था। मुझे लंड और जाँघों पर सपना की पेंटी का किनारा भी महसूस हो रहा था। मेरी बांहें सपना की नर्म बांहों से भी चिपकी हुई थीं। कुल मिलाकर सपना मेरी गोद में सी बैठी हुई थी।
मैंने बाइक को स्टार्ट किया और धीरे से आगे बढ़ा दिया। थोड़ी दूर जाने पर मैं सपना से बोला- अब मैं हैंडल से हाथ हटाता हूँ.. तुम हैंडल संभालो!
यह कह कर मैंने हैंडल छोड़ दिया। मेरे हैंडल छोड़ते ही बाइक थोड़ा लड़खड़ाई.. तो मैंने दुबारा हैंडल पकड़ लिया। फिर बाइक का बैलेंस सम्हालने के बाद धीरे से हैंडल छोड़ते हुए सपना की दोनों कलाईयों को पकड़ लिया और बाइक चलाता रहा।
हम बाइक को मैदान में गोल गोल घुमा रहे थे। इधर मेरे पेट और सपना के कमर के बीच मेरे लंड को दबे हुए काफ़ी समय हो गया था.. क्योंकि लंड भी खड़ा था तो लंड में दर्द होने लगा था।
मैं बाइक रोक कर लंड को एड्जस्ट भी नहीं कर सकता था.. क्योंकि मुझे ऐसा करता देख सपना बुरा मान सकती थी और बाइक के चलने के दौरान मैं सपना की कलाई भी नहीं छोड़ सकता था, क्योंकि वो बाइक संभाल भी नहीं पा रही थी। मेरे हाथों के सहारे पर वो मज़े से बाइक चला रही थी।
मेरे खड़े लंड को तो वो भी अपनी कमर पर महसूस कर रही थी। शायद इसी लिए वो लंड की चुभन से बचने के लिए कभी-कभी अपनी कमर को इधर-उधर हिलाती थी, पर उसके ऐसा करने से मेरा लंड दबने के साथ रगड़ता भी था।
अब मुझसे दर्द सहना मुश्किल था और अंधेरा भी हो चुका था, सो मैंने बाइक रोक दी और ‘आज के लिए बस इतना ही..’ कहकर उन दोनों को अपने पीछे बैठाया और घर की ओर चल दिया।
आज बाइक चला कर सपना बहुत ही खुश थी।
घर पहुँच कर मैं अपने कमरे में चला गया और पजामा खोल कर लंड को हल्के हाथों से तेल लगा कर मालिश की, तब जाकर लंड के दर्द से राहत मिली, पर इस सबसे मेरा मन बहुत ही खुश था।
रात को कुछ खास नहीं हुआ.. सबने मिलकर खाया-पिया और अपने-अपने कमरों में सोने चले गए।
सपना का एग्जाम एक दिन का ही था.. सो कल का कोई प्रोग्राम नहीं था। सुबह-सुबह फिर वही कोयल सी आवाज़ कानों में पड़ी- मामाजी गुड मॉर्निंग.. सुबह हो गई.. उठ जाइए!
मैंने आँख खोलकर देखा, तो सामने सपना ही थी.. पर मुझसे काफ़ी दूर ही खड़ी मुस्कुरा रही थी।
मैंने भी उसे ‘गुड-मॉर्निंग’ कहा और घड़ी की तरफ देखा तो चौंक गया.. क्योंकि अभी तो सिर्फ़ सुबह के 4:30 बजे थे।
मैं सपना की ओर देखते हुए बोला- अभी तो सुबह के सिर्फ़ 4:30 बजे हैं.. इतनी जल्दी क्यों उठा दिया?
सपना- मुझे बाइक सीखने जाना है।
मैं- पर अभी तो बाहर अंधेरा है!
सपना- मैं मैदान में नहीं.. रोड में सीखूँगी और इस वक़्त रोड भी तो खाली होती है.. चलिए ना, मामाजी प्लीज़!
मैं- लेकिन सपना..
सपना- लेकिन-वेकिन कुछ नहीं.. अभी चलना है.. तो अभी चलना है, बस आप जल्दी से उठो!
मैं- पर कपड़े तो बदल लो!
सपना- नहीं.. मैं ऐसे ही ठीक हूँ, आप चलो बस.. मैं कुछ नहीं जानती।
मैंने देखा वो एक लूज़ ट्रैकसूट वाला पजामा और टी-शर्ट पहने हुई थी।
आज मुझे टी-शर्ट के अन्दर सपना की चूचियां कुछ ज़्यादा ही बड़ी लग रही थीं.. शायद उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई थी, जिस कारण उसकी चूचियों के निप्पल टी-शर्ट में साफ पता चल रहा था। उसकी टी-शर्ट भी पतले कपड़े की थी। नीचे देखा तो पजामा भी ढीला-ढाला था.. फिर भी उसकी गांड का उभार का पता चल रहा था।

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