प्रिंसिपल सर के साथ मस्ती


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उन्होंने मुझे वापिस अपनी बाँहों में भर लिया और चूमने लग गए और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। जिससे में ऊपर से पूरी नंगी हो गई और मेरे दोनों मम्मे आज़ाद हो गए।
राज सर मेरे रसीले चूचों पर टूट पड़े और उनको अपने मुँह में लेकर चूसने और काटने लग गए।
इससे मेरी सीत्कारें भी बढ़ने लग गई थीं.. जो रोशनी को साफ़ सुनाई दे रही थीं।
फिर उन्होंने मेरी पैन्टी भी खींच कर उतार दी और मुझे पूरी मादरजात नंगी कर दिया।
मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं अपने स्कूल में ही नंगी हो चुकी हूँ.. वो भी प्रिंसिपल सर के सामने।
इसी बीच राज नीचे बैठ कर मेरी चूत को चूमने-चाटने में लग गए। अब मुझसे भी संयम करना मुश्किल हो रहा था। मैं अपने होंठों को काटने लगी और अपने हाथ प्रिंसिपल सर के बालों में फेरने लगी।
मैं एक दीवार के सहारे खड़ी एक नंगी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी, मैंने कहा- प्रिंसिपल सर.. बस अब मुझे चोद दो.. नहीं तो मैं बाहर जाकर किसी से भी चुदवा लूँगी।
प्रिंसिपल सर ने कहा- मेरी जान बाहर किसी से भी क्यों.. यहाँ तेरा यार है ना तेरी ज़बरदस्त चुदाई करने के लिए..
‘ओह..तो देर क्यों लगा रहे हो.. आ जाओ ना.. जल्दी और अपनी जान को चोद दो..’
उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ी करके अपने हाथ से मेरी एक टांग हवा में उठा ली और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया।
वो अभी तक कपड़े पहने हुए थे.. मैंने कहा- प्रिंसिपल सर.. अपने कपड़े तो खोल लो पैन्ट की चैन में से लौड़ा लगाने में क्या मजा आएगा?
फिर राज ने अपनी पैन्ट खोली और नंगा होकर वापिस आकर.. अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया।
उनका लंड 8 इंच का था.. लेकिन भुसन्ड काला और मोटा था.. जो मुझे पसंद है।
मैं अपने चूतड़ों को हिलाने में लग गई उसको भी यकीन हो गया कि मैं भी चुदाई का खूब मज़ा ले रही हूँ। उसने भी बम-पिलाट चुदाई शुरू कर दी।
‘आह.. ओह.. प्रिंसिपल सर.. आज अपने मुझे रंडी बना दिया.. आऊहह..’
‘हाँ मेरी रंडी कोमल.. मेरी जान अब मैं तुझे रोज चोदूँगा.. तेरी खूब चुदाई करूँगा.. और तेरी चूत.. गाण्ड.. और बोबे इतने बड़े कर दूँगा कि गाँव में सबसे सेक्सी तू ही लगेगी और हर कोई तुझे ही चोदना चाहेगा.. देखना मेरी कोमल.. ओह्ह..’
‘अय्याअ.. उईमाआ… आआ प्रिंसिपल सर.. जरा आराम से चोदिए न.. दर्द होता है..’
‘कोमल मेरी रंडी.. साली दर्द तो होगा.. तू रोज स्कूल में नई साड़ी पहन कर आती है.. आह्ह.. कैसे अपनी गाण्ड मटकाती है.. आह.. ऐसा लगता है कि खा जाऊँ.. कोमल ओहह..’
वो एक बार झड़ने वाले थे.. तो मैं नीचे बैठ गई और उनका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लग गई।
उनका लौड़ा बहुत ही बड़ा था.. जब मुँह में लिया.. तब मुझे पता लगा.. उनका पानी थोड़ा नमकीन सा था.. वो पूरा झड़ गए.. तब भी मैं चूसे जा रही थी।
वो मेरे बोबे दबा रहे थे.. और मैं ज़ोर से सिसकारी लेकर प्रिंसिपल सर का लंड चूसे जा रही थी.. हमको काफ़ी देर हो गई थी।
तभी रोशनी अन्दर आ गई और हम दोनों को इस हालत में देख कर हँसने लगी और बोली- प्रिंसिपल सर आपने तो कोमल भाभी जी को चोद दिया और कोमल भाभी आप प्रिंसिपल सर का लंड चूस रही हो.. बाप रे वैसे तो आप कैसी सीधी सी दिखती हो?
‘ रोशनी क्या करूँ.. तेरे भाई साहब तो बाहर रहते हैं.. तो मुझे भी चुदाई की ज़रूरत तो होती ही है। सच कह रही हूँ.. राज प्रिंसिपल सर जी का लंड बहुत बढ़िया है..। इसी लिए तो इनसे मस्ती से चुदवा रही हूँ.. बस तुम किस को बोलना मत..’
‘कोमल भाभी.. जरा धीरे चूसो.. बाहर तक आवाजें जा रही हैं.. और जल्दी खेल खत्म करो घर चलो.. नहीं तो किसी को शक हो जाएगा। एक बजे छुट्टी हो गई थी और हमको 2 बजे गए हैं।’
मैं बोली- रोशनी.. बस कुछ देर और बस..
फिर प्रिंसिपल सर ने मुझे रोशनी के सामने ही गोद में उठा कर नीचे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।
मैं रोशनी के सामने ही प्रिंसिपल सर की गोद में लटक कर चुदवाने लगी।
प्रिंसिपल सर ने रोशनी से कहा- रोशनी मेरा मोबाइल ले लो.. हम दोनों की फोटो और वीडियो खींच लो..
‘नहीं प्रिंसिपल सर.. कोई मोबाइल देख लेगा.. ऐसा मत करो..’
‘नंगी कोमल.. साली रंडी तू ऐसे तो नहीं मानेगी.. तुझे डरा कर तो रखना ही पड़ेगा.. ताकि तू रोज मुझसे चुदवा सके..’
फिर रोशनी प्रिंसिपल सर का मोबाइल लेकर हम दोनों की फोटो लेने लगी।
‘कोमल भाभी आप प्रिंसिपल सर की गोद में चुदते हुए बहुत अच्छी लग रही हो..’
‘ रोशनी नहीं ले.. रुक जा..’
‘नहीं भाभी.. नहीं.. कल प्रिंसिपल सर मुझे स्कूल से निकाल देंगे।’
वो मेरी चुदाई की वीडियो प्रिंसिपल सर के मोबाइल में रिकॉर्ड करने लग गई।
फिर राज गुरू जी ने मुझे नीचे घोड़ी बना कर चोदा.. फिर मेरी गाण्ड भी मारने लग गए।
‘अहह.. ओमाआअ.. प्रिंसिपल सर.. मैं मर गई मैंने कभी गाण्ड नहीं मरवाई है.. आपका लौड़ा बहुत बड़ा है.. प्लीज़ निकालो..’
‘बस मेरी कोमल रण्डी.. तुझे थोड़ा दर्द होगा.. बस.. ले गया.. अहहहह.. ओह.. आआ.. याह.. आह..’
करीब 20 मिनट तक राज ने चुदाई की.. फिर हम दोनों झड़ गए और नीचे गिर गए।
रोशनी हम दोनों को फोटो अब भी निकाल रही थी।
फिर प्रिंसिपल सर ने कहा- कोमल मेरी जान आज से तेरी सेलरी 5000 रूपए महीने हो गई..
बस मैं और खुश हो गई और प्रिंसिपल सर के गले से लग गई.. किस करने लगी।
प्रिंसिपल सर बोले- फिर से चुदवाना है क्या.. घर नहीं जाना क्या.. चुम्मी क्यों कर कर रही है अब?
मैं हँसने लगी।
फिर प्रिंसिपल सर ने कहा- रोशनी मेरी और कोमल मैडम की अलग-अलग पोज़िशन में नंगी फ़ोटो निकालो।
मेरे बाल बहुत लंबे थे.. मैंने खोल लिए और मुझे पास खींच कर राज खुद फोटो लेने लगे और मुझसे कहा- कोमल मैडम.. एक बार नंगी ही बोर्ड के पास जाकर बच्चों को पढ़ाने की एक्टिंग करो..
मैं हंसती हुई एक्टिंग करने लगी.. चुदाई करवा कर मेरे बोबे फूल कर कड़क हो गए थे और खूब हिल रहे थे।
रोशनी और प्रिंसिपल सर मेरी फोटो निकाल रहे थे।
‘मेरी कोमल.. आज तुम एक रंडी लग रही हो.. सच्ची..’
यूँ रोशनी मैडम और मैं उनको देख कर हँसने लगीं।
मैंने कपड़े पहने और घर आने लगी..
हम दोनों रास्ते में हँसते हुए बातें करते आ रहे थे- रोशनी.. और मैं क्या करती.. मुझे भी बड़ी आग लग रही थी..
‘कोई बात नहीं कोमल भाभी.. जो भी होता है.. अच्छा ही होता है.. इसी बहाने आपकी सेलरी भी बढ़ गई है।’
फिर एक दिन मैं रोशनी प्रिंसिपल सर और एक-दो अन्य जोड़े हमारे वाले प्रिंसिपल सर के मिलने वाले थे.. वो भी सरकारी स्कूल में टीचर ही थे।
प्रिंसिपल सर उनके साथ हमको भी घुमाने ले गए.. हम लोग 4 औरतें थीं और 3 आदमी थे। हम सभी वॉटरफॉल की तरफ गए.. तो क्या हुआ कि मैं अपने साथ में कपड़े लाना भूल गई थी।
हम वहाँ सब खूब घूमें. खाना खाया मस्ती की.. अब नहाने की बारी आई।
तो सब साथ ही नहा रहे थे.. कुछ पास के गाँव लोग भी थे.. सभी ने नहाना शुरू कर दिया.. मुझे याद आया कि मैं तो अपने कपड़े लाना ही भूल गई हूँ और गुरू जी की जिद पर मैं साड़ी पहने ही नहाने लगी थी।
मैं सोच रही थी.. अब क्या करूँगी।
मैंने रोशनी से कहा- रोशनी मेरे तो कपड़े गीले हो गए.. और मैं तो दूसरे कपड़े भी साथ नहीं लाई हूँ.. अब क्या होगा?
रोशनी ने कहा- प्रिंसिपल सर.. सुनो कोमल मैडम कपड़े नहीं लाई हैं.. अब ये घर कैसे जाएंगी? ये घर पर अपने ससुर जी वगैरह किसी को भी बोल कर भी नहीं आईं..’
फिर प्रिंसिपल सर ने कहा- अरे कोई बात नहीं.. यहीं से ले नए कपड़े ले लेंगे.. क्यों कोमल मैडम..
सब हँसने लगे और कहा- चिंता छोड़ो.. मस्ती करो.. नहाओ.. मज़े लो..
सब एक-दूसरे पर पानी फेंक रहे थे.. बहुत मज़ा आ रहा था।
फिर सब बाहर निकल कर अपने बदन को पोंछ कर कपड़े आदि बदलने लगे।
अब मैं क्या करती.. मैं तो गीली खड़ी थी.. मैं पानी में ही बैठी रही..
फिर प्रिंसिपल सर बाहर गए.. कहीं सड़क पर जाकर.. वहाँ से कुछ कपड़े लाए.. उन्होंने एक पोलिथीन लाकर मुझे दी.. मैं एक पेड़ के पीछे जाकर गीले वाले कपड़े खोलने लगी।
बाकी सब मैडम और टीचर पास के मंदिर में दर्शन के लिए चले गए थे।
प्रिंसिपल सर मेरे पास में ही खड़े होकर कपड़े लिए खड़े थे, वो तो मेरा नंगे होने का इंतजार कर रहे थे।
जब मैंने सब कपड़े खोल दिए.. नंगी हो गई और प्रिंसिपल सर के लाए हुए कपड़े निकाले तो उसमें से वेलवेट की लाल रंग की एक बहुत ही सुंदर ब्रा और पैन्टी निकली।
मैंने वो पहनी और एक स्कर्ट टाइप फ्रॉक निकली.. वो मेरे घुटनों तक ही आ रही थी।
मैंने कहा- प्रिंसिपल सर यह छोटी स्कर्ट क्यों लाए.. यह मेरे को नहीं आएगी!
‘अरे कोमल मैडम.. पहन लो, यहाँ वैसे भी अपने गाँव का कोई नहीं है.. और वैसे भी जब तक आपकी साड़ी भी सूख जाएगी.. तभी तक ही तो पहननी है.. चलो जल्दी से पहन लो।’
मैंने वो स्कर्ट पहन ली.. अब क्या बताऊँ आपको.. मैं एक 19-20 साल की छोटी सी जवान लड़की की तरह लग रही थी। मेरे मम्मे इन कपड़ों में बहुत ही टाइट लग रहे थे.. जिससे मेरे मम्मे और भी उभर कर बाहर को दिखने लगे।
मेरे आधे से ज्यादा मम्मे बाहर निकले पड़ रहे थे और नीचे से बस घुटनों तक की ही स्कर्ट थी.. तो मेरी गोरी-गोरी जाँघें भी साफ़ दिख रही थीं।
फिर प्रिंसिपल सर ने कहा- अरे जल्दी करो कोमल मैडम.. कितना टाइम लगेगा.. जल्दी करो ना.. हम भी मंदिर चलते हैं।
मैं जैसे ही पेड़ के पीछे से बाहर आई.. तो प्रिंसिपल सर की आँखें फटी की फटी रह गईं।
‘वाउ.. सो हॉट.. कोमल मैडम आप तो इस स्कर्ट में बिल्कुल माधुरी दीक्षित जैसी लग रही हो.. कोमल मेरी जान प्लीज़ एक फोटो लेने दो न..’
मैंने कहा- नहीं गुरू जी बाकी सब लोग साथ में हैं.. अभी नहीं प्रिंसिपल सर.. बाद में ले लेना।
प्रिंसिपल सर नहीं माने और मेरी फोटो निकालने लगे और मैं मना भी नहीं कर पाई।
मुझे पेड़ के सहारे खड़ा करके फोटो लेते.. कभी लिटा कर.. कभी बाल खोल कर.. कभी सेक्सी स्टाइल में.. मतलब अब उन्हें मंदिर जाने की देर नहीं हो रही थी।
उन्होंने सब तरह के फोटो खींचे.. और प्रिंसिपल सर ने कहा- कोमल.. जानू एक किस करने दो.. कोई नहीं देखेगा.. सब उधर हैं.. प्लीज़ कोमल मैडम.. प्लीज़ जान.. मान जाओ..
मैंने कहा- बस किस.. और कुछ नहीं.. और किस भी केवल एक बस..
‘हाँ जान.. बस एक किस..’
‘ओके..’
प्रिंसिपल सर ने पेड़ के पीछे आकर मुझे खड़ा करके मेरे होंठों पर अपने होंठों को रख कर गहरा चुम्बन करने लगे। फिर चूमने के साथ ही ज़ोर से मेरे मम्मों को भी दबाने लगे।
मैं फिर एक मर्द की गर्मी पाकर सीत्कारियां लेने लगी- ओह्ह.. नहीं प्रिंसिपल सर.. अब चलते हैं.. कोई आ जाएगा.. सब साथ हैं.. क्या सोचेंगे..
‘कुछ नहीं.. कोमल जानू.. आह.. तुम सच्ची एक माल हो।’
और मेरी फ्रॉक को मम्मों के ऊपर से हटा दिया.. मेरे मम्मों को ब्रा से भी निकाल कर उनको चूसने लगे।
आखिर मैं भी एक औरत हूँ.. तो मैं भी गर्म हो गई और उनका साथ देने लगी।
‘आह्ह.. गुरू जी नहीं.. आह्ह.. ज़ोर से नहीं.. आह्ह.. नहीं दबाओ न.. मम्मों में बहुत दर्द हो रहा है.. देखो आपने कल स्कूल में दबा-दबा कर कितने बड़े कर दिए थे..’
‘अभी बड़े कहाँ हुए कोमल जान.. बहुत बड़े करूँगा अभी.. देखना जब तू चलेगी ना.. तो भी ये हिलेंगे.. और गाँव के हर मर्द के लौड़े खड़े हो जाएंगे.. देखना..’
वे मेरे हाथ को अपनी पैन्ट में ले जाकर लंड से मेरे हाथ को रगड़ने लगे।
फिर मैंने उनकी पैन्ट को नीचे करके उनका लंड बाहर निकाल लिया और नीचे बैठ गई.. अब मैं उनका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लग गई।
‘अहह मुआईईईया.. उमममाआ.. मुउआ… अहज.. आह.. बहुत बड़ा है आपका..’
‘हाँ कोमल जान.. तुझे देख कर ये और बड़ा हो जाता है.. और जोर से चूस.. अपने प्यारे लौड़े को.. आह्ह..’
फिर प्रिंसिपल सर ने मुझे गोदी में लेकर मेरी चूत में अपना लौड़ा फिट करके मेरी चुदाई करने में लग गए।
हम अपनी चुदाई में इतने खो गए कि हमको ध्यान ही नहीं रहा कि कोई हमें देख रहा है।
जब मेरी नज़रें मिलीं.. तो मैंने प्रिंसिपल सर को कहा- प्रिंसिपल सर.. देखो अपने साथ वाले सब आ गए हैं.. और हमको देख रहे हैं.. आपने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा.. आपने मेरी इज्जत खराब कर दी।
अब तक सभी दूसरे प्रिंसिपल सर और मैडम लोग नजदीक आ गए.. तब भी प्रिंसिपल सर ने मेरी चुदाई नहीं रोकी और गोद में लेकर मेरी चुदाई किए जा रहे थे।

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